डिजिटल बैंकिंग और उपभोक्ता वित्तीय व्यवहार: आधुनिक अर्थव्यवस्था में डिजिटल वित्त की भूमिका

Authors

  • Pallavi Rani

Keywords:

डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय व्यवहार, डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, डिजिटल अर्थव्यवस्था।

Abstract

डिजिटल प्रौद्योगिकी ने आधुनिक वित्तीय व्यवस्था के स्वरूप और कार्यप्रणाली में व्यापक परिवर्तन किया है। बैंकिंग सेवाओं का पारंपरिक शाखा-आधारित मॉडल अब मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट, त्वरित भुगतान प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वित्तीय सेवाओं के माध्यम से अधिक गतिशील एवं ग्राहक-केंद्रित हो रहा है। डिजिटल बैंकिंग ने वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता, गति, सुविधा और पहुँच में महत्वपूर्ण सुधार किया है तथा उपभोक्ताओं के बचत, भुगतान, ऋण, निवेश और दैनिक वित्तीय निर्णयों के व्यवहार को प्रभावित किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र डिजिटल बैंकिंग की अवधारणा, विकास, आर्थिक महत्व और उपभोक्ता वित्तीय व्यवहार पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन में वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान, वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता विश्वास, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता तथा डिजिटल विभाजन जैसे प्रमुख आयामों पर चर्चा की गई है। डिजिटल बैंकिंग से लेन-देन की लागत कम होने, वित्तीय सेवाओं तक पहुँच बढ़ने और औपचारिक वित्तीय प्रणाली के विस्तार की संभावना उत्पन्न होती है। दूसरी ओर, डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा के दुरुपयोग, अत्यधिक ऋण लेने, वित्तीय निर्णयों में स्वचालित प्रणालियों पर निर्भरता और डिजिटल असमानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। शोध-पत्र का निष्कर्ष है कि डिजिटल बैंकिंग का वास्तविक आर्थिक लाभ तभी व्यापक रूप से प्राप्त किया जा सकता है जब तकनीकी नवाचार के साथ वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता संरक्षण, साइबर सुरक्षा और समावेशी डिजिटल बुनियादी ढाँचे को समान महत्व दिया जाए।

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Published

30-06-2019

Issue

Section

शोध-पत्र