About the Journal
प्राकृतविद्या (ISSN: 0971-796X) एक प्रतिष्ठित बहुविषयक (Multidisciplinary) शोध पत्रिका है, जो उच्च गुणवत्ता वाले मौलिक अनुसंधान, समीक्षात्मक लेखों, आलोचनात्मक अध्ययनों तथा विद्वत्तापूर्ण विमर्श के प्रकाशन के लिए समर्पित है। पत्रिका का उद्देश्य ज्ञान की विभिन्न विधाओं के मध्य संवाद को सशक्त बनाना, अनुसंधान की गुणवत्ता को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय एवं वैश्विक शैक्षणिक समुदाय के लिए एक विश्वसनीय प्रकाशन मंच उपलब्ध कराना है।
यद्यपि पत्रिका का विशेष संबंध प्राकृत भाषा, जैन अध्ययन, भारतीय दर्शन, साहित्य, इतिहास एवं सांस्कृतिक अध्ययन से रहा है, तथापि इसका दायरा केवल इन्हीं विषयों तक सीमित नहीं है। प्राकृतविद्या मानविकी, सामाजिक विज्ञान, शिक्षा, भाषा एवं साहित्य, इतिहास, संस्कृति, पुरातत्त्व, धर्म अध्ययन, दर्शन तथा अन्य संबंधित विषयों में मौलिक एवं अंतर्विषयक (Interdisciplinary) शोध कार्यों का स्वागत करती है। पत्रिका का उद्देश्य विविध ज्ञान-परंपराओं के मध्य शैक्षणिक संवाद स्थापित करना तथा समकालीन शोध को व्यापक मंच प्रदान करना है।
पत्रिका निष्पक्ष संपादकीय प्रक्रिया, विशेषज्ञों द्वारा सहकर्मी समीक्षा (Peer Review), अनुसंधान की मौलिकता तथा शैक्षणिक नैतिकता के उच्चतम मानकों के पालन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रत्येक पांडुलिपि का संपादकीय परीक्षण एवं विषय-विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जिससे प्रकाशित शोध की गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं अकादमिक उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके।
प्राकृतविद्या को पूर्व में UGC Approved List of Journals में Journal No. 40979 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त थी। इसके उपरांत पत्रिका UGC CARE List में Journal No. 1077 के रूप में जून 2019 से 10 फ़रवरी 2025 तक सूचीबद्ध रही। यह पत्रिका की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं अनुसंधान प्रकाशन में उसके महत्वपूर्ण योगदान का प्रमाण है।
पत्रिका विवरण
पत्रिका का शीर्षक: प्राकृतविद्या (Prakritvidya)
ISSN: 0971-796X
वेबसाइट: https://kundkundbharti.org/
प्रकाशन आवृत्ति: अर्द्धवार्षिक (Bi-Annual)
भाषा: बहुभाषी (Multilingual)
विषय-क्षेत्र (Scope): बहुविषयक (Multidisciplinary)
अनुक्रमण (Indexing):
UGC Approved List of Journals (Journal No. 40979)
UGC CARE List (Journal No. 1077; कवरेज अवधि: जून 2019 से 10 फ़रवरी 2025)