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Submission Preparation Checklist

As part of the submission process, authors are required to check off their submission's compliance with all of the following items, and submissions may be returned to authors that do not adhere to these guidelines.
  • प्रस्तुत पांडुलिपि पूर्व में किसी भी पत्रिका, पुस्तक, सम्मेलन कार्यवाही अथवा अन्य माध्यम में प्रकाशित नहीं हुई है तथा वर्तमान में किसी अन्य पत्रिका में प्रकाशन हेतु विचाराधीन नहीं है। यदि ऐसा नहीं है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी **"संपादक हेतु टिप्पणी (Comments to the Editor)"** अनुभाग में प्रदान की गई है।
  • प्रस्तुत की गई पांडुलिपि की फ़ाइल OpenOffice, Microsoft Word अथवा RTF (Rich Text Format) दस्तावेज़ प्रारूप में है।
  • जहाँ भी उपलब्ध हैं, संदर्भों (References) के लिए संबंधित URL (वेब लिंक) प्रदान किए गए हैं।
  • पांडुलिपि का पाठ सिंगल स्पेसिंग में टंकित है, 12-पॉइंट फ़ॉन्ट का उपयोग किया गया है, तथा जहाँ आवश्यक हो वहाँ अंडरलाइन के स्थान पर इटैलिक शैली का प्रयोग किया गया है (केवल URL/वेब पते इसके अपवाद हैं)। सभी चित्र, आकृतियाँ, सारणियाँ एवं अन्य दृश्य सामग्री पाठ के अंत में देने के बजाय संबंधित स्थानों पर उचित क्रम में सम्मिलित की गई हैं।
  • पांडुलिपि लेखक दिशानिर्देश (Author Guidelines) में उल्लिखित शैलीगत (Stylistic) एवं संदर्भ सूची (Bibliographic) संबंधी सभी आवश्यकताओं का पूर्णतः पालन करती है।

Author Guidelines

प्राकृतविद्या (ISSN: 0971-796X) एक बहुविषयक (Multidisciplinary) शोध पत्रिका है, जो विभिन्न विषयों में मौलिक, गुणवत्तापूर्ण एवं अप्रकाशित शोध कार्यों के प्रकाशन हेतु शोधार्थियों, शिक्षकों, विद्वानों तथा विषय-विशेषज्ञों से शोध-पत्र आमंत्रित करती है। पत्रिका का उद्देश्य उत्कृष्ट शैक्षणिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना तथा विभिन्न ज्ञान-विषयों के मध्य संवाद एवं अनुसंधान की नवीन संभावनाओं को विकसित करना है।
प्रस्तुत किया जाने वाला शोध-पत्र पूर्णतः मौलिक होना चाहिए तथा वह किसी अन्य पत्रिका, पुस्तक, सम्मेलन कार्यवाही अथवा अन्य प्रकाशन हेतु पूर्व में प्रकाशित या विचाराधीन नहीं होना चाहिए। लेखक यह सुनिश्चित करें कि पांडुलिपि शोध की दृष्टि से प्रासंगिक, तथ्यपरक, व्यवस्थित तथा स्पष्ट एवं शुद्ध भाषा में लिखी गई हो। प्रत्येक शोध-पत्र के साथ उपयुक्त शीर्षक, सार (Abstract), प्रमुख शब्द (Keywords) तथा संदर्भ सूची (References) अवश्य सम्मिलित की जानी चाहिए। यदि शोध-पत्र में सारणी, चित्र, मानचित्र अथवा अन्य दृश्य सामग्री का उपयोग किया गया है, तो उन्हें स्पष्ट रूप से क्रमांकित एवं शीर्षक सहित प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
पांडुलिपि Microsoft Word (.doc या .docx) प्रारूप में प्रस्तुत की जानी चाहिए। लेखक अपना नाम, संस्थान का नाम, पदनाम, ईमेल पता तथा यदि उपलब्ध हो तो ORCID ID पृथक रूप से उपलब्ध कराएँ, जिससे संपादकीय एवं समीक्षात्मक प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित की जा सके।
प्राप्त सभी पांडुलिपियों का प्रारंभिक परीक्षण संपादकीय मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें शोध-पत्र की विषयानुकूलता, गुणवत्ता, मौलिकता तथा प्रस्तुतीकरण का मूल्यांकन किया जाता है। प्रारंभिक परीक्षण में उपयुक्त पाए जाने वाले शोध-पत्र विशेषज्ञ समीक्षकों के मूल्यांकन हेतु भेजे जाते हैं। समीक्षकों की अनुशंसाओं के आधार पर संपादकीय मंडल शोध-पत्र को स्वीकार करने, आवश्यक संशोधन हेतु वापस भेजने अथवा अस्वीकार करने का निर्णय लेता है। संशोधन अपेक्षित होने पर लेखक निर्धारित समयावधि में संशोधित पांडुलिपि प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
पत्रिका शैक्षणिक नैतिकता एवं अनुसंधान की सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। अतः लेखक यह सुनिश्चित करें कि प्रस्तुत शोध-पत्र साहित्यिक चोरी (Plagiarism), तथ्य-निर्माण (Fabrication), तथ्य-विकृतिकरण (Falsification) अथवा किसी अन्य प्रकार के शैक्षणिक दुराचार से मुक्त हो। शोध-पत्र में प्रयुक्त सभी स्रोतों का उचित संदर्भ देना तथा जिन व्यक्तियों ने शोध में महत्वपूर्ण बौद्धिक योगदान दिया है, उन्हें यथोचित श्रेय प्रदान करना लेखक का दायित्व है।
शोध-पत्र प्रस्तुत करने के साथ लेखक यह प्रमाणित करते हैं कि प्रस्तुत समस्त जानकारी सत्य एवं प्रामाणिक है तथा पांडुलिपि शैक्षणिक प्रकाशन के स्वीकृत नैतिक मानकों का पालन करती है। संपादकीय मंडल को भाषा, शैली, व्याकरण, प्रारूपण एवं प्रस्तुतीकरण की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से आवश्यक संपादकीय संशोधन करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा, बशर्ते कि शोध की मूल विषयवस्तु एवं निष्कर्षों में कोई परिवर्तन न किया जाए।
प्राकृतविद्या (ISSN: 0971-796X) एक बहुविषयक शोध पत्रिका है, जिसे प्रारम्भिक अवधि में UGC Approved List of Journals में Journal No. 40979 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त थी। तत्पश्चात पत्रिका को UGC CARE List में Journal No. 1077 के रूप में सम्मिलित किया गया, जहाँ इसकी आधिकारिक कवरेज अवधि जून 2019 से 10 फ़रवरी 2025 तक रही। यह पत्रिका की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान की विश्वसनीयता तथा उच्च प्रकाशन मानकों के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रमाण है।