मौद्रिक नीति और आर्थिक स्थिरता: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में एक विश्लेषण

Authors

  • Gautami

Keywords:

मौद्रिक नीति, आर्थिक स्थिरता, मुद्रास्फीति, ब्याज दर, केंद्रीय बैंक, मुद्रा आपूर्ति, वित्तीय स्थिरता, आर्थिक विकास।

Abstract

मौद्रिक नीति किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का एक प्रमुख साधन है। केंद्रीय बैंक ब्याज दर, मुद्रा आपूर्ति, तरलता तथा ऋण की उपलब्धता को प्रभावित करके मुद्रास्फीति, आर्थिक गतिविधि, निवेश, रोजगार और वित्तीय स्थिरता पर प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति का महत्व अधिक है क्योंकि इन देशों को मुद्रास्फीति, विनिमय दर अस्थिरता, पूँजी प्रवाह, बाहरी झटकों और सीमित वित्तीय गहराई जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। प्रस्तुत शोध-पत्र मौद्रिक नीति की अवधारणा, उद्देश्यों, प्रमुख उपकरणों और आर्थिक स्थिरता के साथ उसके संबंध का विश्लेषण करता है। इसमें पारंपरिक तथा आधुनिक मौद्रिक नीति दृष्टिकोणों, मुद्रास्फीति नियंत्रण, आर्थिक विकास, निवेश, रोजगार, विनिमय दर और वित्तीय स्थिरता पर मौद्रिक नीति के प्रभावों की चर्चा की गई है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति के सामने आने वाली आपूर्ति-पक्षीय मुद्रास्फीति, राजकोषीय दबाव, पूँजी प्रवाह और वैश्विक आर्थिक झटकों जैसी चुनौतियों का भी अध्ययन किया गया है। शोध-पत्र का निष्कर्ष है कि मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता केवल केंद्रीय बैंक के निर्णयों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि राजकोषीय नीति, वित्तीय प्रणाली, बाह्य क्षेत्र, अपेक्षाओं और संस्थागत विश्वसनीयता के साथ उसके समन्वय पर भी निर्भर करती है। स्थिर एवं विश्वसनीय मौद्रिक व्यवस्था दीर्घकालीन आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकती है।

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Published

30-06-2019

Issue

Section

शोध-पत्र