प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और आर्थिक विकास: उभरती अर्थव्यवस्थाओं की संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ

Authors

  • Sagar Manchanda

Keywords:

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, आर्थिक विकास, वैश्वीकरण, तकनीकी हस्तांतरण, पूँजी निर्माण, रोजगार, उत्पादकता, उभरती अर्थव्यवस्था।

Abstract

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में पूँजी, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन कौशल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है। वैश्वीकरण और आर्थिक उदारीकरण के विस्तार के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश विकासशील एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। घरेलू बचत और निवेश संसाधनों की सीमाओं के कारण अनेक विकासशील देश विदेशी पूँजी को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधारभूत संरचना विकसित करने और नई तकनीकों को अपनाने के साधन के रूप में देखते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अवधारणा, प्रकार, निर्धारक तत्वों तथा आर्थिक विकास के साथ इसके संबंध का विश्लेषण करता है। इसमें पूँजी निर्माण, तकनीकी हस्तांतरण, रोजगार, उत्पादकता, निर्यात, प्रतिस्पर्धा और मानव पूँजी पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है। साथ ही विदेशी कंपनियों के कारण घरेलू उद्योगों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव, लाभ के प्रत्यावर्तन, क्षेत्रीय असमानता, पर्यावरणीय प्रभाव और आर्थिक निर्भरता जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। शोध-पत्र का निष्कर्ष है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का आर्थिक विकास पर प्रभाव स्वतः सकारात्मक नहीं होता; इसका परिणाम देश की संस्थागत गुणवत्ता, मानव पूँजी, घरेलू उद्योगों की क्षमता, नीति ढाँचे और निवेश के क्षेत्र पर निर्भर करता है। इसलिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं को केवल विदेशी पूँजी आकर्षित करने के बजाय ऐसी निवेश नीति अपनानी चाहिए जो तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय मूल्य संवर्धन, रोजगार और दीर्घकालीन उत्पादकता वृद्धि को प्रोत्साहित करे।

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Published

30-06-2018

Issue

Section

शोध-पत्र