महँगाई और आर्थिक विकास: मुद्रास्फीति के कारण, प्रभाव एवं नीतिगत उपाय
Keywords:
मुद्रास्फीति, महँगाई, आर्थिक विकास, मूल्य स्तर, मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, क्रय-शक्ति, ब्याज दर।Abstract
मुद्रास्फीति आधुनिक अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण समष्टिगत आर्थिक समस्याओं में से एक है। सामान्यतः मुद्रास्फीति से आशय अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर वृद्धि से है, जिसके परिणामस्वरूप मुद्रा की क्रय-शक्ति में कमी आती है। सीमित एवं नियंत्रित स्तर की मुद्रास्फीति आर्थिक गतिविधियों के साथ सह-अस्तित्व रख सकती है, किंतु अत्यधिक अथवा अस्थिर मुद्रास्फीति आर्थिक विकास, निवेश, बचत, रोजगार, आय-वितरण तथा जीवन-स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में मुद्रास्फीति की अवधारणा, प्रमुख प्रकार, कारण तथा आर्थिक विकास के साथ इसके संबंध का सैद्धांतिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। इसमें मांग-प्रेरित, लागत-प्रेरित, संरचनात्मक तथा मौद्रिक मुद्रास्फीति के विभिन्न पक्षों पर चर्चा की गई है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास के बीच संबंध सरल और एकरेखीय नहीं है। निम्न एवं स्थिर मुद्रास्फीति आर्थिक गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल वातावरण प्रदान कर सकती है, जबकि उच्च और अनिश्चित मुद्रास्फीति संसाधनों के कुशल आवंटन को बाधित कर सकती है। मुद्रास्फीति का प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों पर समान नहीं पड़ता; निश्चित आय वाले परिवार और निम्न आय वर्ग सामान्यतः अधिक प्रभावित होते हैं। शोध-पत्र में मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, आपूर्ति-पक्ष सुधार, खाद्य प्रबंधन और उत्पादकता वृद्धि जैसे नीतिगत उपायों का भी विवेचन किया गया है। निष्कर्षतः मूल्य स्थिरता और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करना प्रभावी समष्टिगत आर्थिक नीति का केंद्रीय उद्देश्य होना चाहिए।
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2018 प्राकृतविद्या

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.