बेरोजगारी और आर्थिक विकास: भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अध्ययन
Keywords:
बेरोजगारी, आर्थिक विकास, रोजगार, श्रम बाजार, युवा बेरोजगारी, कौशल विकास, अल्परोजगार, मानव पूँजी।Abstract
बेरोजगारी किसी भी अर्थव्यवस्था की प्रमुख सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं में से एक है। इसका संबंध केवल रोजगार के अभाव से नहीं, बल्कि उत्पादन, आय, गरीबी, उपभोग, मानव पूँजी, सामाजिक स्थिरता और आर्थिक विकास की समग्र प्रक्रिया से है। विकासशील देशों में बेरोजगारी की प्रकृति विकसित देशों की तुलना में अधिक जटिल होती है, क्योंकि यहाँ संगठित क्षेत्र की तुलना में अनौपचारिक रोजगार का हिस्सा अधिक हो सकता है तथा खुली बेरोजगारी के साथ अल्परोजगार, मौसमी बेरोजगारी और छिपी बेरोजगारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र बेरोजगारी की अवधारणा, प्रकारों और आर्थिक विकास के साथ उसके संबंध का विश्लेषण करता है। इसमें बेरोजगारी के प्रमुख कारणों के रूप में धीमी रोजगार सृजन क्षमता, कौशल-असंगति, तकनीकी परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, कृषि पर निर्भरता, क्षेत्रीय असमानता तथा श्रम बाजार की संरचनात्मक समस्याओं का अध्ययन किया गया है। विशेष रूप से भारत के संदर्भ में युवाओं, ग्रामीण श्रमिकों, महिलाओं और शिक्षित श्रमबल की रोजगार संबंधी चुनौतियों पर विचार किया गया है। शोध-पत्र यह भी स्पष्ट करता है कि आर्थिक विकास और रोजगार वृद्धि के बीच संबंध हमेशा समान नहीं होता; तकनीकी प्रगति और पूँजी-प्रधान विकास के कारण उत्पादन बढ़ने के बावजूद रोजगार वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी हो सकती है। अंततः रोजगारोन्मुख विकास, कौशल निर्माण, श्रम-प्रधान विनिर्माण, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को प्रोत्साहन, महिला श्रम भागीदारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बेरोजगारी कम करने की महत्वपूर्ण रणनीतियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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