समकालीन हिन्दी साहित्य में दलित विमर्श और सामाजिक न्याय

Authors

  • डॉ. राकेश पांडेय

Keywords:

दलित विमर्श, सामाजिक न्याय, अस्मिता, प्रतिनिधित्व, प्रतिरोध

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र ‘समकालीन हिन्दी साहित्य में दलित विमर्श और सामाजिक न्याय’ विषय का आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। दलित साहित्य जाति-आधारित भेदभाव, अपमान, श्रम, आत्मसम्मान और प्रतिनिधित्व के प्रश्नों को अनुभव तथा आत्मकथन के आधार पर सामने लाता है। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, साहित्यिक अभिव्यक्ति, भाषा-शैली, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, प्रतिनिधि रचनाकार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की शोध-दिशाओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य विषय को केवल साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में समझना है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य अपने समय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति देने के साथ पाठक में आलोचनात्मक चेतना और संवेदनशीलता विकसित करता है।

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Published

12-12-2010

Issue

Section

शोध-पत्र