आधुनिक हिन्दी कविता में पर्यावरण चेतना और पारिस्थितिक दृष्टि
Keywords:
पर्यावरण, आधुनिक कविता, प्रकृति, पारिस्थितिकी, जलवायु चेतनाAbstract
प्रस्तुत शोधपत्र ‘आधुनिक हिन्दी कविता में पर्यावरण चेतना और पारिस्थितिक दृष्टि’ विषय का आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। आधुनिक हिन्दी कविता में प्रकृति-सौन्दर्य के साथ प्रदूषण, जल-संकट, जंगलों का विनाश, विस्थापन और मनुष्य-केंद्रित विकास की आलोचना भी अभिव्यक्त होती है। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, साहित्यिक अभिव्यक्ति, भाषा-शैली, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, प्रतिनिधि रचनाकार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की शोध-दिशाओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य विषय को केवल साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में समझना है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य अपने समय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति देने के साथ पाठक में आलोचनात्मक चेतना और संवेदनशीलता विकसित करता है।
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