हिन्दी कहानी में ग्रामीण जीवन और बदलती सामाजिक संरचना

Authors

  • डॉ. विवेक त्रिपाठी

Keywords:

हिन्दी कहानी, ग्रामीण जीवन, किसान, सामाजिक परिवर्तन, यथार्थवाद

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र ‘हिन्दी कहानी में ग्रामीण जीवन और बदलती सामाजिक संरचना’ विषय का आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। हिन्दी कहानी में गाँव का चित्रण कृषि, ऋण, जाति, श्रम, शिक्षा, पलायन और बदलते पारिवारिक सम्बन्धों के माध्यम से हुआ है। प्रेमचंद से समकालीन कहानी तक ग्रामीण समाज की जटिलता निरन्तर बदलती दिखाई देती है। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, साहित्यिक अभिव्यक्ति, भाषा-शैली, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, प्रतिनिधि रचनाकार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की शोध-दिशाओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य विषय को केवल साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में समझना है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य अपने समय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति देने के साथ पाठक में आलोचनात्मक चेतना और संवेदनशीलता विकसित करता है।

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Published

12-08-2010

Issue

Section

शोध-पत्र