छायावादी हिन्दी कविता में प्रकृति-चित्रण और मानवीय संवेदना

Authors

  • डॉ. नीरज कुमार

Keywords:

छायावाद, प्रकृति, प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र ‘छायावादी हिन्दी कविता में प्रकृति-चित्रण और मानवीय संवेदना’ विषय का आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। छायावादी कविता में प्रकृति केवल दृश्य-सौन्दर्य नहीं, बल्कि आत्मानुभूति, स्मृति, विरह, आशा और दार्शनिक अनुभूति की वाहक है। प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी के यहाँ इसके अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, साहित्यिक अभिव्यक्ति, भाषा-शैली, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, प्रतिनिधि रचनाकार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की शोध-दिशाओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य विषय को केवल साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में समझना है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य अपने समय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति देने के साथ पाठक में आलोचनात्मक चेतना और संवेदनशीलता विकसित करता है।

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Published

06-10-2010

Issue

Section

शोध-पत्र