भक्तिकालीन हिन्दी काव्य में सामाजिक समरसता और लोकचेतना

Authors

  • डॉ. सौरभ मिश्रा

Keywords:

भक्तिकाल, कबीर, रैदास, लोकचेतना, सामाजिक समरसता

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र ‘भक्तिकालीन हिन्दी काव्य में सामाजिक समरसता और लोकचेतना’ विषय का आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। कबीर, रैदास, तुलसीदास, सूरदास और मीराबाई की रचनाओं में भक्ति के साथ सामाजिक अनुभव, लोकभाषा, प्रेम, समानता और नैतिकता की विविध अभिव्यक्तियाँ मिलती हैं। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, साहित्यिक अभिव्यक्ति, भाषा-शैली, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, प्रतिनिधि रचनाकार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की शोध-दिशाओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य विषय को केवल साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में समझना है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य अपने समय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति देने के साथ पाठक में आलोचनात्मक चेतना और संवेदनशीलता विकसित करता है।

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Published

02-07-2010

Issue

Section

शोध-पत्र