प्रेमचंद के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदना

Authors

  • डॉ. आरव वर्मा

Keywords:

प्रेमचंद, सामाजिक यथार्थ, गोदान, किसान जीवन, वर्ग संघर्ष

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र ‘प्रेमचंद के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदना’ विषय का आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। प्रेमचंद ने किसान, मजदूर, स्त्री, निम्नवर्ग और मध्यवर्ग के जीवन-संघर्षों को कथा का केन्द्र बनाया। गोदान, गबन, सेवासदन और निर्मला में आर्थिक विषमता, जाति, विवाह, नैतिकता और औपनिवेशिक समाज के प्रश्न उभरते हैं। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, साहित्यिक अभिव्यक्ति, भाषा-शैली, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, प्रतिनिधि रचनाकार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की शोध-दिशाओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य विषय को केवल साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में समझना है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य अपने समय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति देने के साथ पाठक में आलोचनात्मक चेतना और संवेदनशीलता विकसित करता है।

Downloads

Published

12-12-2010

Issue

Section

शोध-पत्र