हिन्दी साहित्य में स्त्री-विमर्श: चेतना, अस्मिता और सामाजिक परिवर्तन

Authors

  • डॉ. अमित शर्मा

Keywords:

स्त्री-विमर्श, नारी चेतना, अस्मिता, पितृसत्ता, लैंगिक समानता

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र ‘हिन्दी साहित्य में स्त्री-विमर्श: चेतना, अस्मिता और सामाजिक परिवर्तन’ विषय का आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है। महादेवी वर्मा, मन्नू भंडारी, कृष्णा सोबती और मैत्रेयी पुष्पा के लेखन में स्त्री के अनुभव, अधिकार, श्रम, शिक्षा और आत्मनिर्णय के प्रश्न अलग-अलग रूपों में सामने आते हैं। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, साहित्यिक अभिव्यक्ति, भाषा-शैली, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ, प्रतिनिधि रचनाकार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की शोध-दिशाओं पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य विषय को केवल साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में समझना है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य अपने समय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति देने के साथ पाठक में आलोचनात्मक चेतना और संवेदनशीलता विकसित करता है।

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Published

06-09-2010

Issue

Section

शोध-पत्र