सतत आर्थिक विकास और हरित अर्थव्यवस्था: वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते आयामों का अध्ययन

Authors

  • Ravinder Ahlawat

Keywords:

सतत आर्थिक विकास, हरित अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित वित्त, हरित रोजगार, संसाधन दक्षता, समावेशी विकास।

Abstract

वर्तमान वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में आर्थिक विकास, पर्यावरणीय संरक्षण और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना एक प्रमुख चुनौती बन गया है। पारंपरिक आर्थिक विकास मॉडल मुख्यतः उत्पादन, आय, निवेश और उपभोग में वृद्धि पर केंद्रित रहे हैं, किंतु प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन, जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता के ह्रास, प्रदूषण और असमानता ने इस मॉडल की दीर्घकालीन स्थिरता पर प्रश्न खड़े किए हैं। इसी संदर्भ में सतत आर्थिक विकास और हरित अर्थव्यवस्था की अवधारणाएँ महत्वपूर्ण हो जाती हैं। हरित अर्थव्यवस्था ऐसी आर्थिक व्यवस्था को प्रोत्साहित करती है जिसमें संसाधनों का कुशल उपयोग, कम-कार्बन विकास, पर्यावरणीय संरक्षण, सामाजिक समावेशन तथा दीर्घकालीन आर्थिक समृद्धि को एक साथ आगे बढ़ाया जाए।

यह शोध-पत्र सतत आर्थिक विकास की वैचारिक पृष्ठभूमि, हरित अर्थव्यवस्था की प्रकृति, आर्थिक विकास और पर्यावरण के संबंध, हरित निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित रोजगार, हरित वित्त तथा विकासशील देशों की चुनौतियों का विश्लेषण करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हरित संक्रमण केवल पर्यावरणीय नीति का विषय नहीं है, बल्कि यह उत्पादन, रोजगार, निवेश, तकनीकी नवाचार और आर्थिक नीति की व्यापक पुनर्संरचना से जुड़ा हुआ है। सतत विकास को सफल बनाने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र, वित्तीय संस्थाओं और नागरिक समाज के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

Downloads

Published

15-06-2026

Issue

Section

शोध-पत्र